Monday, July 26, 2010

टंकार - ऐसा क्या है इस शब्द में ?


लोग अक्सर पूछते हैं की इस कंप्यूटर गेम के लिए "टंकार" शब्द ही क्यों चुना। मुझे लगता है जितना यह शब्द इस खेल के बारे में बता सकता है उतना कोई दूसरा शब्द नहीं । हम में से बहुत से लोग इस शब्द को भूल चुके होंगे इसलिए यह सुनने में इतना अपरिचित सा लगता है। "टंकार" शब्द शायद अब हमारी जीवनशेली में कभी न आये पर यह और ऐसे कई शब्द हमें पुराणों से जोड़ते हैं। यह हमें महाभारत और रामायण काल से जोड़ते हैं। यह उस समय का प्रतीक हैं जब धरती पर अर्जुन, कर्ण, भीष्म जैसे धनुर्धर हुआ करते थे और उनके दिव्य अस्त्रों से धरती कांप उठती थी और आकाश गूँज उठता था।

संस्कृत का यह शब्द "टंकार" उस ध्वनि के लिए है जो धनुष की प्रत्यंचा को खींच कर छोड़ने पर उत्पन होती है । अगर आप में से किसी को बी आर चोपड़ा की महाभारत के संवाद याद हों तो आपको यह भी याद होगा की कुछ संवादों में अर्जुन के धनुष "गांडीव" और उसकी "टंकार" का प्रयोग है । तो जिस खेल में सारा युद्ध ही अस्त्रों पर हो उस खेल का नाम "टंकार" से अच्छा क्या हो सकता था ?

इस शब्द का खेल के साथ औचित्य कायम रखने के लिए हमनें प्रत्येक अस्त्र छोड़ने पर एक ध्वनि दी। हमारी कोशिश थी की इस ध्वनि में वही गूँज हो जो किसी महान धनुर्धर के अस्त्र छोड़ने पर होती होगी। कहना मुश्किल है कि हम अपनी कोशिश में कितने कामयाब हो पाए, पर शायद यह दुनिया का पहला ऐसा कंप्यूटर खेल हो जिसका नाम ध्वनि पर रखा गया हो ।